81 की उम्र में भी फ़िजिकल ट्रेनर Isha Ghosh की चुस्ती का कोई जोड़ नहीं, स्कूलों में चलाती हैं स्पेशल ट्रेनिंग

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किसी के लिए ढलता उम्र एक पड़ाव होता है तो किसी के लिए महज एक संख्या। कोई थककर बैठ जाता है तो कोई अपने सफर को आगे बढ़ाता रहता है। रांची के चाईबासा की रहने वाली 81 वर्षीय ईशा घोष ( Isha Ghosh ) के लिए भी 81 साल महज एक संख्या ही है।

उनके अंदर भरे उत्साह की ही देन है कि उन्होंने उम्र के पहरे को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। घोष ने स्कूलों में विशेष शारीरिक प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित करने में खुद को व्यस्त रखा। भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) की राज्य समिति के सदस्य के रूप में वह कई दशकों से स्कूली छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद कर रही हैं।

ईशा घोष ( Isha Ghosh ) दिन में आठ घंटे शारीरिक प्रशिक्षण करती है। फिट रहने के लिए, वह रोजाना शहर में लगभग सात किलोमीटर पैदल चलती हैं। शहर के विभिन्न स्कूलों में शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम ( Physical Training Programmes ) आयोजित करती हैं। घोष जापानी संगीत, चढ़ाई और योग पर अभ्यास करती हैं। ईशा घोष ( Isha Ghosh ) बच्चों को अनुशासित जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं।

ईशा घोष ( Isha Ghosh ) 2003 से चाईबासा में स्काउट एंड गाइड ( Scout and Guide ) आवासीय परिसर में रह रही हैं। वह भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) द्वारा दिए गए मामूली सी पारिश्रमिक के साथ अपने दैनिक खर्च को पूरा करती हैं, जबकि स्थानीय निवासी विशेष जरूरतों के दौरान उनकी मदद करते हैं।

ईशा घोष ( Isha Ghosh ) ने कहा, “घर पर आलस्य में बैठना अच्छा नहीं है। हर किसीको समाज के लिए अंतिम सांस तक कुछ करना चाहिए। 1963 में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) में शामिल होने के बाद से मैं लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद कर रही हूं। समाज के लिए सेवा भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) सदस्य के लिए एक धर्म की तरह है। जीवन के आठ दशक पूरे करने के बाद, मुझे समाज की सेवा करना बहुत पसंद है और इससे मुझे आंतरिक संतुष्टि मिलती है।”

दिवंगत सेना कर्मी विभूति भूषण घोष ( Vibhuti Bhushan Ghosh ) की बेटी ईशा घोष ( Isha Ghosh ) का जन्म 1938 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने लखनऊ से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वह पिछले 56 वर्षों से भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) से जुड़ी हैं। 1963 में एक गाइड के रूप में उन्होंने शुरुआत की थी।

भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ( BSG ) के पश्चिमी सिंहभूम जिला सचिव सुरेश सिंह ने कहा कि यह महिला शारीरिक दक्षता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ” एक आरामदायक जीवन के लिए उसे वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन को आगे आना चाहिए।”

नगरपालिका बंगला मध्य विद्यालय ( Nagarpalika Bangla Madhya Vidyalay ) के विज्ञान शिक्षक असीम कुमार सिंह ने कहा कि स्कूली छात्र घोष द्वारा प्रशिक्षण सत्र का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि इस उम्र में भी छात्रों को उनके प्रशिक्षण और उनकी फिटनेस से प्रेरणा मिलती है।

~Shravan Pandey

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