Fact Check: क्या सच में 14 फ़रवरी को भगत सिंह को फांसी दी गई थी?

116

हर साल जब 14 फ़रवरी का दिन आता है तब सोशल मीडिया पर एक मैसेज अनवरत, बिना थके चक्कर लगाना शुरू कर देता है। इस दिन दुनिया Valentine’s Day सेलिब्रेट करती है मग़र भारत में इसे ‘पश्चिमी सभ्यता’ का नाम देकर विरोध किया जाता है। इस दिन भारत में ‘Matra Pitra Pujan Divas’ का कैंपेन चलाया जाता है। कुछ लोग तो इस दिन को मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर ‘ब्लैक डे’ कहते हैं।

पिछले कुछ सालों से हर Valentine’s Day पर व्हाट्सएप पर एक मैसेज दौड़ाया जाता है। इस मैसेज में बताया जाता है कि इसी दिन साल 1931 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी पर लटकाया गया था। इस मैसेज में आग्रह किया जाता है कि इस दिन को Valentine’s Day के रूप में न मनाएँ। बल्कि शहादत को दर्शाने के लिए black day के रूप में मनाएँ।

लेक़िन इन दावों का सच्चाई से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। इन तीनों को 23 मार्च 1931 को फाँसी दी गई थी और यह रिकॉर्ड का विषय है। जब यह दावा किया जाता है कि 14 फरवरी को भगत सिंह को फांसी दी गई थी, तो वे अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दे पाते। फ़िर, उन्होंने एक नया सिद्धांत पेश किया।

साल 2017 में, राइट विंग संगठनों ने दावा किया कि भगत सिंह और दो अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को वास्तव में इस दिन मौत की सजा दी गई थी और उन्हें 23 मार्च को फांसी पर लटकाया गया था।

शिवसेना (बाल ठाकरे) और शिव सेना पंजाब के कार्यकर्ताओं ने 2017 में कहा कि Valentine’s Day को ‘black day’ के रूप में मनाया जाना चाहिए क्योंकि इन स्वतंत्रता सेनानियों को 1931 में इसी दिन मौत की सजा मिली थी।

ब्लैक डे या फ़िर लव डे ?

इन कार्यकर्ताओं ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दावा किया कि 14 फरवरी, 1931 को तीनों को लाहौर षडयंत्र मामले में मौत की सजा दी गई थी, हालांकि उन्हें उसी साल 23 मार्च को फांसी दे दी गई थी।

इंद्रजीत करवाल, वरिष्ठ राज्य उपाध्यक्ष शिवसेना (बाल ठाकरे) और राजेश पाल्टा, उपाध्यक्ष शिवसेना पंजाब ने कहा कि 14 फरवरी एक “प्रेम दिवस के बजाय काला दिन था, क्योंकि हमारे नायकों को इस दिन मौत की सजा मिली थी।” मग़र इस दावे का कोई आधार नहीं है क्योंकि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को मौत की सजा 7 अक्टूबर, 1930 को सुनाई गयी थी।

14 फरवरी का कोई महत्व नहीं है

वास्तव में, 14 फरवरी का इन तीनों वीर सपूतों के ट्रायल के लिए कोई महत्व नहीं है। भगत सिंह को 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली में केंद्रीय विधानसभा से गिरफ्तार किया गया था जहाँ उन्होंने और बटुकेश्वर दत्त ने बम फेंके थे। दिल्ली बम मामले की सुनवाई 7 मई, 1929 को शुरू हुई। 12 जून को दोनों को दोषी ठहराया गया और जीवन भर के लिए ले जाया गया।

भगत सिंह लाहौर षडयंत्र मामले में भी एक अभियुक्त थे, जो ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या से संबंधित था। इस मामले में ट्रायल 10 जुलाई, 1929 को शुरू हुआ।

~Shravan Pandey

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here