Gurjar Aandolan: गुर्जरों का 13 साल का संघर्ष, आरक्षण की मांग को लेकर अब तक 72 गुर्जरों ने दी जान

आगामी लोकसभा चुनाव के करीब आने से राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। अब फिर बारी आ गई है घोषणापत्रों की। ऐसे में कुछ वर्ग इन राजनीतिक पार्टियों को उनके वादे याद दिलाने के लिए सड़क पर भी उतर रहे हैं। इसी सिलसिले में राजस्थान में एक बार फिर गुर्जर समुदाय अपनी मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर उतर आया है। गुर्जर समुदाय की मांग है कि सरकार सभी प्रक्रिया पूरी करके 5 प्रतिशत आरक्षण बैकलाग के साथ दे। इससे पहले 24 सितंबर 2015 को विधानसभा में एसबीसी विधेयक पारित हुआ था। राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2015 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए इसे लागू किया था। यह 14 महीने चला और 9 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने इसे खत्म कर दिया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

आइये एक नजर डालते हैं Gurjar Aandolan के इतिहास पर, कि कैसे यह आन्दोलन शुरू हुआ और आज कहाँ आकर पहुंचा है।

गुर्जरों ने आरक्षण के लिए अपना आंदोलन 13 साल पहले साल 2006 में शुरू किया था। तब से लेकर अब तक वसुंधरा सरकार में 4 बार और गहलोत सरकार में अब दूसरी बार गुर्जर अपनी मांग को लेकर घरों से बाहर आये हैं। गुर्जरों का यह आंदोलन कई बार हिंसा का रूप धारण कर चुका है। वसुंधरा सरकार में 3 बार ट्रैक जाम किया गया जबकि गहलोत सरकार में दूसरी बार। 13 साल में 72 गुर्जरों ने जान दे दी। लेकिन आज भी वे अपनी मांग को लेकर वही खड़े हुए हैं।

2006 : गुर्जरों ने एसटी ( ST ) में शामिल करने की मांग को लेकर पहली बार आंदोलन किया। इस दौरान हिंडौन में पटरियां उखाड़ी गईं। इस आंदोलन को लेकर भाजपा सरकार ने इस मामले में एक कमेटी बनाई। लेकिन कोई नतीजा निकलकर नहीं आया।

21 मई 2007 : इस बार आंदोलनकारियों ने पीपलखेड़ा पाटोली में राजमार्ग को बाधित किया। इस आंदोलन ने हिंसात्मक रूप धारण कर लिया और 28 लोग मारे गए। इस बार भाजपा सरकार से समझौता हुआ। चौपड़ा कमेटी बनाई गई। कमेटी ने गुर्जरों को एसटी आरक्षण के दर्जे के लायक नहीं माना।

23 मई 2008 : इस बार पीलुकापुरा ट्रैक पर बयाना में रेल आवागमन को बाधित किया गया। इस दौरान 7 लोगों की जान गई। दूसरे दिन सिकंदरा में हाईवे जाम किया गया जिसमें 23 लोग मारे गए। इसका परिणाम यह हुआ कि भाजपा सरकार ने 5% एसबीसी आरक्षण पर सहमति जता दी। लेकिन मामला हाईकोर्ट में अटक गया।

24 दिसंबर 2010 : इस बार आंदोलनकारियों ने पीलुकापुरा में रेल सेवा को बाधित किया। इसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस सरकार ने 5% आरक्षण पर समझौता कर लिया। अब जबकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था। ऐसे में 1% आरक्षण दे दिया गया। इससे ज्यादा आरक्षण देने पर यह 50% आरक्षण के कैप से ज्यादा हो रहा था।

21 मई 2015 : एक बार फिर पीलुकापुरा बयाना में आंदोलन किया गया। अब भाजपा की सरकार आ चुकी थी। इस आंदोलन का नतीजा यह हुआ कि भाजपा सरकार ने गुर्जर सहित 5 जातियों को 5% एसबीसी आरक्षण दिया। इस तरह कुल आरक्षण बढ़कर 54% हो गया। बाद में हाईकोर्ट ने इसपर रोक लगा दी। इस वजह से अब 1% आरक्षण मिल रहा है।

इन आंदोलनों में 13 साल के दौरान कुल 754 केस दर्ज हुए। इन मामलों में से कुल 105 मामले कोर्ट में हैं। 35 मामलों की पुलिस जांच कर रही है। 614 केसों में या तो एफआर लग गई या केस वापस ले लिए गए। 13 साल की लम्बी लड़ाई के बावजूद आज गुर्जरों को अपने मांग के लिए सड़क पर एक बार फिर आना पड़ा है।

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