IIT ग्रेजुएट ने असम के 11 बाढ़ प्रभावित गांवों के बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ दी सिंगापुर में नौकरी

एक स्टूडेंट अपनी मेहनत के दम पर कुछ सपने सजाता है। उसकी सफलता पर उसके घर वाले भी बहुत खुश होते हैं। मग़र उसका एक फैसला पूरे परिवार को नाख़ुश कर देता है। इस शख्स का नाम है बिपिन धाने। बिपिन धाने के लिए आगे का रास्ता साफ दिख रहा था। उन्होंने 2013 में नेवल आर्किटेक्चर में IIT-खड़गपुर से स्नातक करने के बाद सिंगापुर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी पाई।

लेक़िन महाराष्ट्र के सतारा का रहने वाले इस IIT ग्रेजुएट की जिंदगी का कुछ अलग ही प्लान था। और, काफ़ी हद तक उन्होंने उस चीज़ को क़रीब से महसूस भी किया। बिपिन को कभी भी कारपोरेट लाइफ़ की चाहत नहीं थी। वहां काम करके कोई फुलफिलमेंट नहीं था। क़रीब डेढ़ साल काम करने कर बाद ही उन्होंने काम छोड़ने का इरादा बना लिया था।

एक दिन सोशल मीडिया पर बिपिन का उनकी एक फ्रेंड से संपर्क हुआ। उनकी वह फ़्रेंड असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर माजुली के दूरदराज के नदी द्वीप में वंचित बच्चों को पढ़ाती थी। बिपिन शिक्षा क्षेत्र में काम करने की इच्छा रखते थे। उनकी फ़्रेंड ने उन्हें बताया कि वहां पढ़ाने के अवसर थे। आखिरकार अक्टूबर 2015 में बिपिन ने काम छोड़ने की हिम्मत जुटाई और माजुली के लिए अपना रास्ता बना लिया।

बिपिन के इस फैसले से बिपिन तो ख़ुश थे मग़र उनके पैरेंट्स को निराशा हुई। वे बेटे के इस फैसले से नाख़ुश हो गए। बिपिन के पैरेंट्स पहले से ही जानते थे कि वह काम छोड़ने वाले हैं मग़र वे नाराज़ हो गए। विशेषकर, उनके पिताजी क्रोधित थे।

लगभग 4 साल का समय बीत चुका है। आज बिपिन The Hummingbird School का संचालन करते हैं। यह एक सह-शिक्षण संस्थान है। यह स्कूल माजुली के कुलमु गांव में है। यह शैक्षणिक संस्थान इंडिजिनियस मिसिंग ट्राइबल कम्यूनिटी के वंचित बच्चों के लिए है। इस स्कूल में 11 गांवों के 240 बच्चे पढ़ते हैं। जिनमें से 70 बच्चे हॉस्टल में रहते हैं। इस स्कूल में 5वीं ग्रेड तक का क्लास चलता है।

अब स्थिति बदल चुकी है। कल तक जिस पिता को अपने बेटे के फ़ैसले पर दुःख हुआ था, गुस्सा आया था आज उसी पिता को बेटे के इस उपलब्धि पर गर्व महसूस होता है। आज वही पिता अपने बेटे के इस जज़्बे की कहानी हर किसी के साथ साझा करते हैं।

छात्रों के साथ काम करते हुए बिपिन और उनके छह सहयोगियों की टीम ने कम्यूनिटी के साथ अपने काम को आगे बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की। इसलिए नवंबर 2017 में उन्होंने आयंग ट्रस्ट ( Ayang Trust ) की स्थापना की। Mising भाषा में ‘Ayang’ का अर्थ होता है किसी भी समुदाय के साथ काम करते समय प्यार और करुणा का मूल भाव। यह उनके प्यार और स्नेह के कारण ही है कि बिपिन और उनकी टीम उनके साथ काम कर रहे हैं।

स्कूल के अलावा, अयांग वर्तमान में पांच अन्य सरकारी स्कूलों को बदलने और सामुदायिक पुस्तकालय चलाने के लिए काम कर रहा है, जो आसपास के पांच गांवों के बच्चों की सेवा कर रहा है।

यह ट्रस्ट स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। यह उत्पादकों के सामूहिक प्रचार और माजुली की ग्रामीण महिला बुनकरों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हाल ही में, इन बुनकरों को अपना यार्न बैंक मिला है। IIT ग्रेजुएट बिपिन के लिए यह एक उल्लेखनीय अनुभव रहा है। उन्हें कभी नहीं पता था कि चीजें बदल जाएंगी और इतनी तेजी से आगे बढ़ेंगी। उन्हें उम्मीद है कि जब तक संभव होगा तब तक वह वहां रहेंगे।

uvayu.com बिपिन के इस मजबूत इच्छाशक्ति औऱ सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना करता है। उम्मीद है कि इसी नक्शे कदम चलकर और भी शिक्षित युवा आगे आएंगे और देश को नई दशा और दिशा देंगे।

~Shravan Pandey

No Comments Yet

Leave a Reply

Your email address will not be published.

युवा देश से जुड़ी समाजिक सरोकार रखने वाली खबर, आम आदमी से जुड़े खास मुद्दों के करीब, बेवज़ह और बेतुके के ड्रामे से दूर, हवा हवाई बातों के इतर जमीनी हकीकत से जुड़ी खबरों को देखने के लिए सब्सक्राइब करे हमारा चैनल युवायु। Contact us: info@uvayu.com