Inspiration: मुश्किल परिस्थितियों में बेटे ने किया टॉप, गर्व से भावुक हो उठी मां

इस दुनिया में कुछ लोग भाग्य के भरोसे अपने भविष्य के चमकने का इंतज़ार करते हैं तो कुछ लोग अपने हौसले और कड़ी मेहनत के दम पर हालात को बदलने की क्षमता रखते हैं। सीबीएसई ने हाल ही में दसवीं कक्षा के परिणाम की घोषणा की। इस परीक्षा में एक ऐसे लड़के ने टॉप किया है जो भाग्य पर नहीं बल्कि अपने कड़ी मेहनत और समर्पण पर भरोसा रखता है।

यशस डी नामक इस लड़के के लिए भाग्य जैसी अवधारणाएं आधारहीन मिथक हैं। उसका मानना ​​है कि फोकस और कड़ी मेहनत ही सफलता के दो मार्ग हैं। खैर, उसके विश्वास का फल तब मिला जब 10वीं कक्षा के सीबीएसई के परिणाम हाल ही में घोषित किए गए।

यशस हुलियार(Huliyar) में विद्यावारिधि इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ता है। उसने 500 अंकों में से 498 अंक हासिल किए हैं। वह न सिर्फ कर्नाटक में टॉपर बना बल्कि उसने चेन्नई रीजन में भी टॉप किया।

The Better India से बातचीत में यशस ने कहा, “मैं 90% के आसपास एक अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहा था, लेकिन मैंने राज्य टॉप करने का सपना कभी नहीं देखा था। इसलिए, यह जानकर ख़ुशी से झूम उठा था। अच्छा लगता है जब सालों की मेहनत रंग लाती है।”

प्रेरणा से भर देगा यशस के संघर्ष की दास्तां

यशस तुमकुरु(Tumakuru) जिले के Chikkanayakanahalli तालुका के एक सुदूर गांव Thammanahalli का रहने वाला है। यशस एक किसान के घर में जन्मा है। पिता का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण यशस को पढ़ाई के अलावा अन्य जिम्मेदारियां भी उठानी पड़ती हैं।

यशस की मां नेत्रावती ने कहा, “मेरे पति को हाल ही में स्ट्रोक हुआ था। उनके स्वास्थ्य के मुद्दों के कारण, यशस को मैदान में उतरना पड़ा। कभी-कभी ऐसा लगा जैसे मेरा बेटा सही समय से पहले एक वयस्क बन गया। जो मेरे लिए दुःखद होने के साथ ही गौरवपूर्ण अहसास भी है।

लेकिन, निश्चित रूप से इन सबके बावजूद राज्य में टॉप करना अविश्वसनीय से कम नहीं है। मुझे शब्दों से परे गर्व है।” वह कहती हैं कि उनके बेटे में कभी भी क्षमता या फोकस की कमी नहीं थी। उसका दिन सुबह में जल्दी शुरू होता था और वह हर एक दिन अपने स्कूल पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की यात्रा करता था।

नहीं था कोई टाइम टेबल, बड़े होकर बनना चाहता है आईआईटियन

अन्य स्टूडेंट्स की तरह यशस रणनीति बनाने में यकीन नहीं करता था। जब भी सम्भव होता वह पढ़ाई करता था। मग़र जब भी पढ़ता था तब उसका ध्यान पूरी तरह केंद्रित रहता था। यशस कहता है, “मैंने केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि किस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाए ताकि भविष्य में मैं अपने परिवार के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रख सकूं।”

यशस बड़े होकर एक आईआईटियन बनने का आकांक्षी है। वह ग्यारहवीं और बारहवीं में साइंस से पढ़ाई करने चाहता है। वह बड़े होकर टेक्नोलॉजी में रिसर्च करना चाहता है। उसने पहले ही बेंगलुरु के वाग्देवी भवन पीयू कॉलेज में कक्षाएं शुरू कर दी हैं।

सफलता के लिए अपने मंत्र को साझा करते हुए वह कहता है, “स्टेज मेकअप आपको कभी दूर नहीं ले जा सकता है और मैंने हमेशा खुद को सावधानी के इस शब्द को याद दिलाया। आपको पहले दिन से अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि कुछ देरी होने पर केवल दबाव जमा होता है। इसलिए मैं स्कूल शिक्षक के साथ एक समय में एक अध्याय का अध्ययन और समापन करता था। संगति से वास्तव में फर्क पड़ता है।”

~Shravan Pandey

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