ISRO की वो मेहनती महिला वैज्ञानिक जिन्होंने अपने प्रतिभा के दम पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में लहराया परचम

ISRO की वो मेहनती महिला वैज्ञानिक जिन्होंने अपने प्रतिभा के दम पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में लहराया परचम
सफल होने की ख्वाहिश हर कोई रखता है। एक कहावत है कि एक सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। यह कहावत बहुत पुरानी हो चुकी है। अब इस कहावत को अगर कुछ घुमा फिराकर नया कहावत बनाया जाए तो वह काफी मजेदार हो जाता है। तो यह नया कहावत सफल अंतरिक्ष मिशन के बारे में है, ” हर सफल भारतीय अंतरिक्ष मिशन के पीछे हजारों महिला वैज्ञानिकों का हाथ होता है”। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(ISRO) की सफलता में कई महिला वैज्ञानिकों ने अपना योगदान दिया है। भारत ने अंतरिक्ष में कई उपग्रहों को भेजा है तथा चन्द्रमा और मंगल के आसपास कक्षा भी स्थापित की है। भारत द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित किए गए उपग्रह की खास बात यह है कि यह कम खर्च में अपनी कक्षा में स्थापित हो गया। भारत की इस सफलता की दुनिया भी दीवानी है। यहीं वजह है कि विकसित देश भी भारत के सफलता की प्रशंसा करते हैं।
भारत की इन सफलताओं के पीछे जो शक्ति है उसके बारे में शायद ही कोई जानता हो क्योंकि यह वह शक्ति है जो काम तो करती है मगर लोगों की नजर में दिखती नहीं। यह शक्ति “भारत की नारी” शक्ति है। तेज-तर्रार, प्रतिभाशाली महिलाओं ने अपने कारनामों का लोहा मनवाया है। इन महिलाओं ने न सिर्फ सामाजिक अड़चनों का पहरा तोड़ा है बल्कि सोच के पहरे को भी तोड़कर सच में तब्दील किया है। विज्ञान जैसे क्षेत्र में जहाँ पुरुषों का बोलबाला रहा है वहाँ इन महिलाओं ने अपनी क्षमता को बखूबी साबित किया है। इन प्रतिभाशाली महिलाओं के अदम्य साहस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि “इनके सर के ऊपर फैला आसमान भी इन पर पहरा नहीं लगा पाया”।
उत्साह से भरपूर मजबूत इरादों वाली वो स्वतंत्र महिलाएं कुछ आपके पास पड़ोस के महिलाओं जैसी ही दिखती हैं। मगर इनकी प्रतिभा का कोई सानी नहीं है। विज्ञान जैसे अथाह ज्ञान वाले क्षेत्र में दबदबा रखने वाली ये महिलाएं टोनी स्टार्क और एलोन मस्क को भी प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। तो आइये जानते हैं ISRO के वुमन पावर “नारी शक्ति” को
1. रितु करिधाल: मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुई रितु बचपन से ही सोच की दुनिया में गोता लगाती थीं। रितु करिधाल चाँद को देखकर सवालों में खो जाती थी। उनके दिमाग में यह सवाल उठता था की आखिर चाँद छोटा और बड़ा कैसे होता है। चाँद को लेकर उनकी उत्सुकता बढ़ती गई। रितु अक्सर सोचती थी कि चाँद के अँधेरे वाले हिस्से में क्या है? रितु को भारत का ‘रॉकेट वुमन’ भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पली बढ़ी रितु एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। भारत के मंगल कक्षीय मिशन, मंगलयान में उप संचालन निदेशक के पद को सुशोभित किया है। रितु, इसरो(ISRO) के विभिन्न परियोजनाओं में अपनी अहम भूमिका निभा चुकी हैं।
ISRO Women Scientist महिला वैज्ञानिक
2. मौमीता दत्ता: मौमीता ने एक छात्र के तौर पर चंद्रयान मिशन कि पढ़ाई की। अब मौमीता मंगल मिशन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं। इन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से अप्लाइड फिजिक्स में एम। टेक की डिग्री हासिल की। आज वह ‘मेक इन इंडिया’ के हिस्से के तौर पर ऑप्टिकल सायंस में स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए एक टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। ‘मार्श मिशन में 20 प्रतिशत महिला वैज्ञानिकों की भागेदारी है’।
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3. नंदिनी हरिनाथ: नंदिनी ने सर्वप्रथम ISRO में काम किया और अगले 20 साल तक पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्टार ट्रेक सीरीज को देखकर उन्हें विज्ञान पढ़ने की प्रेरणा मिली। टीचर और इंजीनियर घराने से ताल्लुकात रखने वाली नंदिनी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में स्वतः खिंची चली गईं। आज एक उप निदेशक के तौर पर 2000 के नोट पर मंगलयान मिशन के प्रिंट को देखकर उन्हें गर्व महसूस होता है। नंदिनी कड़ी मेहनत करती हैं। उनकी लगन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घर में बच्चे होने के बावजूद वह मंगलयान लांच होने के पहले कई दिनों तक घर नहीं गई थी।
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4. अनुराधा टी के: अनुराधा इसरो में जीओसैट प्रोग्राम के निदेशक के तौर पर सबसे वरिष्ठ महिला अधिकारी हैं। मात्र 9 साल की उम्र में ही इनके मन में अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का खयाल आया। जब नील आर्मस्ट्रांग ने पहली बार चाँद पर कदम रखा तब अनुराधा सोचने पर मजबूर हो गई। सबसे वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर अनुराधा, इसरो(ISRO) में कार्यरत अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। अपने छात्र जीवन में वह याद करने वाली विषयों के अपेक्षा तर्क वाली विषयों में ज्यादा रूचि रखती थी। आज इसरो के एक महत्वपूर्ण विभाग में उसी तर्क निपुण दिमाग का इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक़, कभी-कभी वह भूल जाती हैं कि वह एक महिला हैं क्योंकि इसरो में सबके साथ समान व्यवहार होता है।
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5. एन वल्लर्मथी: टी के अनुराधा के बाद एन वल्लर्मथी एक ऐसी महिला थीं जो इसरो में किसी उपग्रह मिशन का हेड रही हों। इन्होंने भारत के के लांच में प्रतिनिधित्व किया। 52 वर्ष की उम्र में इन्होंने तमिलनाडु को गर्व से भर दिया। एन वल्लर्मथी ऐसी पहली महिला हैं जिन्होंने रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट के मिशन का प्रतिनिधित्व किया।
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6. मिनल संपत: मिनल संपत ने मंगल कक्षीय मिशन के लिए एक दिन में 18 घंटे तक काम किया है। इसरो में एक सिस्टम इंजीनियर के तौर पर मिनल ने 500 वैज्ञानिकों के टीम की अगुआई की है। इन्होंने दो साल तक तो एक भी छुट्टी नहीं ली। यहाँ तक की इन्होंने रविवार तथा राष्ट्रीय अवकाश के दिन भी छुट्टी नहीं ली। इनकी यह लगन मार्श मिशन की सफलता के साथ ही फलीभूत हुई। आगे चलकर मिनल इसरो की प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला निदेशक बनना चाहती हैं।
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7. कृति फौजदार: कृति एक कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। वह उपग्रहों को उनके उचित कक्षा में रखने के लिए मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी के तौर पर काम करती हैं। कृति फौजदार उस टीम का हिस्सा हैं जो सेटेलाइट और उससे संबंधित मिशन पर नज़र रखता है। कृति वह जिम्मेदार व्यक्ति हैं जो कुछ गलत होने पर उसमें सुधार करती हैं। इनका कार्य समय भी निश्चित नहीं है। उन्हें कभी दिन में तो कभी रात्रि पहर में काम करना पड़ता है। मगर ऐसी अनियमित स्थिति का उनपर कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि कृति अपने काम से बहुत प्यार करती हैं।
ISRO Women Scientist महिला वैज्ञानिक
8. टेस्सी थॉमस: टेस्सी थॉमस भले ही इसरो के लिए काम नहीं करती मगर उन्हें इस लिस्ट से बाहर नहीं रखा जा सकता। वह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन(DRDO) में काम करती हैं। टेस्सी के कड़े मेहनत और लगन की ही देन है कि भारत इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBMs) के समूह का सदस्य बनने के करीब पहुंच चुका है। अपनी उपलब्धियों के कारण टेस्सी को मीडिया ‘अग्निपुत्री’ कहकर बुलाती है। वह भविष्य में एम। टेक करके इसरो में एक बेहतर वैज्ञानिक बनना चाहती हैं।
ISRO Women Scientist महिला वैज्ञानिक
आज की तारीख में इसरो में 16 हजार से ज्यादा की संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। हर एक दिन इस संख्या में इजाफा भी हो रहा है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसरो की कमान पूरी तरह पुरुषों के हाथ में है क्योंकि कुल 7 मुख्य पदों पर पुरूष ही काबिज़ हैं। मगर सच्चाई यह भी है कि हजारों महिलाएं हमारे मुख्य अंतरिक्ष संस्था के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। इन महिलाओं को रोकने का माद्दा आसमान में भी नहीं है।
6 Comments
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