Kumbh Mela 2019: जिंदगी के अंधेरे में भव्यता तलाशती यह मासूम बच्ची

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प्रयागराज में आयोजित Kumbh Mela 2019 में कई रंग आपको देखने को मिल जाएंगे। इन रंगों में आस्था, विश्वास और उमंग की ढेर है। लेकिन इसी भव्य और दिव्य कुंभ के बीच एक मासूम सी बच्ची अपने जिंदगी के अंधेरे को दूर करने के लिए अपनी जिंदगी की भव्यता को ढूंढ रही है। एक छोटी सी मासूम बच्ची अपने जीवन निर्वाह के लिए इसी भीड़ में संघर्ष कर रही है। लेकिन शायद ही इस बच्ची के संघर्ष पर आस्था, विश्वास और उमंग में डूबी भीड़ की नजर गई हो। अगर गई भी होगी तो कौन ऐसी तस्वीर को देखना चाहेगा।

हमने हिंदी फिल्मों में एक गीत सुना है जिसके बोल हैं, बचपन हर गम से बेगाना होता है। मगर आज यह तस्वीर देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि ये गीत महज झूठे तराने हैं। 5 साल की चांदनी का संघर्ष इस गीत को झूठा साबित करता है। इस चकाचौंध के बीच एक 5 साल की लड़की अपने जिंदगी की तलाश कर रही है। और, ऐसे करतब दिखा रही है जिससे उसकी जान भी जा सकती है। भले ही हमारे देश में बाल श्रम को लेकर कड़े कानून बनाए गए हों। लेकिन, यह तस्वीर इन कानूनों को ठेंगा दिखाती है।

सरकार ने 14 साल तक के सभी बच्चों के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा आवश्यक किया है। जिसके लिए सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन इस 5 साल की लड़की के लिए कोई अभियान किसी काम का नहीं है। क्योंकि अगर प्रशासन को यह तस्वीर दिखाई पड़ती तो शायद आज यह लड़की सड़क पर लोगों के सामने अपनी जिंदगी जीने के लिए खतरनाक करतब दिखाते हुए नजर नहीं आती।

भले ही चांदनी के लिए सोने का समय तय न हो मगर उस मासूम सी बच्ची की नींद खुलने से पहले उसके दिन भर के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार हो जाती है। रोज सुबह उठकर उस बच्ची को भीड़ के बीच जाना होता है। यह अलग बात है कि चांदनी की उम्र के बच्चे मेला देखने और खिलौनों के साथ खेलने के लिए उत्सुक होते हैं। मगर, चांदनी ना तो मेला देखती है और ना ही खिलौनों से खेलती है।

एक मासूम सी बच्ची के कंधे पर पूरे परिवार का बोझ है। उसकी तीन बहनें और मां बाप हैं। अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाने की जिम्मेदारी 5 साल की मासूम सी बच्ची के कंधे पर है। जिस उम्र में वह बच्ची खुले आसमान के नीचे खुलकर अपनी जिंदगी जी सकती थी उसी खुले आसमान के नीचे पूरे परिवार का बोझ उठा कर चल रही है। बेहद ही सधे कदमों से धरती से 10-12 फुट की ऊंचाई पर पतली सी रस्सी पर चलती, फुदकती और करतब दिखाती है।

इस गुड़िया की हैरतअंगेज करतब राह चलते लोगों की निगाहें बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करती हैं और लोगों की निगाहें कुछ क्षण के लिए ही सही मग़र ठहर सी जाती हैं। हमारे समाज की यह कैसी विडंबना है कि 5 साल की एक बच्ची को अपना और परिवार का पेट पालने के लिए रोज अपनी जान को दांव पर लगाना पड़ता है। ये बात और है कि लोग आसानी से भला कहां अपनी जेबें खाली करते हैं।

बमुश्किल दिन भर में ये नन्हीं सी जान अपने अथक प्रयासों से केवल दो सौ रुपए ही कमा पाती है। चांदनी का बचपन कोई अकेला नहीं है, बल्कि उसकी जैसी ना जाने कितनी नन्हीं जिंदगियां पेट भरने के लिए रोज अपनी जिंदगी को दांव पर लगाती हैं। आप हम जैसे बहुत से लोग हैं जो पुण्य कमाने कुंभ स्नान करने जाते हैं लेकिन उस पतली रस्सी से लटकते बचपन को देख कर आंखे फेर लेते हैं और बगल से गुजर जाते हैं।

~Shravan Pandey

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