Legal System: भारतीय अदालतों में 3 करोड़ से अधिक मामले लंबित; सबसे पुराना मामला 1914 का

एक ऐसी रिपोर्ट सामने आयी है जो भारतीय अदालतों की प्रक्रिया और उसकी कार्यकुशलता पर सवालिया निशान लगाती है। जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों के फर्स्ट एकाउंट पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहाँ 2.99 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित पड़े हुए हैं। कई मामले तो ऐसे हैं जो 50-60 सालों से लंबित पड़े हुए हैं।

इसका मतलब यह हुआ है कि न्याय के इंतज़ार में व्यक्ति के प्राण पखेरू उड़ जाएं मग़र उसे न्याय नहीं मिलेगा। लगभग 25,000 मामले ऐसे हैं जिनमें से 7000 से ज्यादा मामले ऐसे हैं जिनके लिए न्यायाधीशों ने कारण के रूप में “अभियुक्त फरार” का हवाला दिया है। ये मामले निचली न्यायपालिका में लंबित पड़े हुए हैं। कुछ मामले तो साल 1958 से लंबित पड़े हुए हैं।

मामलों के निपटान में देरी को लेकर दिए गए ये 6 कारण

मामलों के निपटान में सतत देरी के लिए शीर्ष छह कारणों के रूप में परीक्षण अदालतों के समक्ष साक्ष्य दर्ज नहीं करने वाली पार्टियाँ; उच्च न्यायालयों (HC) और सुप्रीम कोर्ट (SC) द्वारा दी गई रोक; महत्वपूर्ण गवाहों की अनुपस्थिति; पार्टियों को कोई दिलचस्पी नहीं है; और सरकारी दस्तावेजों को प्राप्त करने में देरी को उद्धृत किया गया है।

इससे पहले TOI ने बताया था कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में 78,000 से अधिक मामले 30 से अधिक वर्षों से लंबित हैं। सबसे पुराना लंबित मामला साल 1914 का है। 24 उच्च न्यायालयों का प्रदर्शन तीन दशकों से अधिक लंबित 56,000 से अधिक मामलों के साथ समान रूप से उल्लेखनीय है। देश की सभी अदालतों में HC और शीर्ष अदालत सहित कुल पेंडेंसी 3.12 करोड़ के उच्च स्तर को पार कर गई है।

संवैधानिक अदालतों में बार-बार स्थगन एक मानदंड बन गया है

नए पेश किए गए कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के हिस्से के रूप में, मामलों के निपटान में देरी के कारणों के लिए लोअर कोर्ट के जजों को रिकॉर्ड करना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, सभी न्यायाधीश कारण नहीं बता रहे हैं। SC और HC के न्यायाधीशों ने देरी के कारणों को दर्ज करने में नवीनतम रिपोर्टिंग तंत्र का भी पालन नहीं किया है। संवैधानिक अदालतों में बार-बार स्थगन एक मानदंड बन गया है।

ऑनलाइन पोर्टल NJDG दायर किए गए मामलों पर हर अदालत की स्थिति रिपोर्ट, दो साल, पांच साल, 10 साल और 30 से अधिक वर्षों से लंबित लोगों की आपत्ति और स्थिति के तहत प्रदान करता है। मामलों को स्थगित किए जाने की स्थिति में एक न्यायाधीश द्वारा कारण दर्ज कर दिया जाता है, जिसे एक मामले के पूरे जीवन चक्र में तीन तक सीमित कर दिया गया है।

~ Shravan Pandey

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