Liquor Ban: कर्नाटक में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग, 4000 महिलाओं का बेंगलुरु में हल्लाबोल

कर्नाटक में शराब पर प्रतिबंध ( Liquor Ban ) की मांग को लेकर कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्र की करीब 2000 महिलाओं ने बुधवार को बेंगलुरु की तरफ कूच किया। इन महिलाओं की मांग है कि पूरे राज्य भर में शराब पर प्रतिबंध ( Liquor Ban ) लगाया जाये।

कथित तौर पर, यह मार्च ‘Beer Beda Neer Beku’ के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस मार्च का नेतृत्व मद्यपान निषेध आंदोलन ( Madyapana Nishedha Andolana ) द्वारा किया जा रहा था। इस मार्च में ग्रामीण कुली कार्मिक संघटने ( Grameena Kooli Karmika Sanghatane ), किसान संघटने ( Kissan Sanghatane ), स्वराज इंडिया ( Swaraj India ), स्वराज अभियान ( Swaraj Abhiyan ) समेत विभिन्न संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए।

यह मार्च 19 जनवरी को राज्य के चित्रदुर्ग जिले में शुरू किया गया था। बेंगलुरु पहुंचने के लिए केवल दस दिनों में 200 किलोमीटर से अधिक का रास्ता तय किया गया। एक खबर के मुताबिक, यह मार्च नौ गांवों में रुका, जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ औपचारिक रूप से बातचीत कर उन्हें शराब के इस्तेमाल के खतरों से अवगत कराया। मार्च में राज्य के 23 जिलों से महिलाएं शामिल हुईं और हर दिन महिलाओं ने लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय की।

पैरों पर फफोले पड़ गए मगर नहीं थमा Liquor Ban मार्च

मिली जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी को बेंगलुरु पहुंचीं महिलाओं में से कुछ के पैर में छाले पड़ गए थे। वे मल्लेश्वरम के एक आश्रय स्थल में ठहरीं। 28 जनवरी को एक 60 वर्षीय महिला की मौत हो गयी थी। वह महिला पैदल मार्च का हिस्सा थी, उसे एक मोटरसाइकिल ने बेंगलुरु के बाहरी इलाके नेलमंगला के पास धक्का मार दिया था।

इस मौत ने प्रदर्शनकारियों को नाराज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को दोषी ठहराया है। कथित तौर पर, इस पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे रवि कृष्ण रेड्डी ने कहा है कि महिलाओं के मार्च के लिए पुलिस और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई।

शराब की खपत के दुष्प्रभावों को उजागर करने के उद्देश्य से महिलाओं का एक बड़ा समूह कर्नाटक के कई गांवों में सार्वजनिक सभाओं और रैलियों में मदद करता है। अधिकांश महिलाओं ने कहा है कि उनके परिवार के सदस्य, जिनमें बेटे और पति शामिल हैं, शराब के दुरुपयोग की समस्या का शिकार हो गए हैं क्योंकि शराब इतनी आसानी से उपलब्ध है। कई पुरुष भी मार्च का हिस्सा थे जिनके परिवार के कई सदस्य शराब का शिकार हुए हैं।

कथित तौर पर, कन्नड़ लेखक देवनूरु महादेवा ( Devanooru Mahadeva ) और सामाजिक कार्यकर्ता एसआर हिरेमथ ( SR Hiremath ) ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शराब के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। जारी मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है, जो राज्य के लिए इतना अधिक राजस्व प्रदान करता है। इससे पहले, मुख्यमंत्री के रूप में मैंने अरक(arrack) पर प्रतिबंध लगा दिया था।”

~Shravan Pandey
No Comments Yet

Leave a Reply

Your email address will not be published.

युवा देश से जुड़ी समाजिक सरोकार रखने वाली खबर, आम आदमी से जुड़े खास मुद्दों के करीब, बेवज़ह और बेतुके के ड्रामे से दूर, हवा हवाई बातों के इतर जमीनी हकीकत से जुड़ी खबरों को देखने के लिए सब्सक्राइब करे हमारा चैनल युवायु। Contact us: info@uvayu.com