Lok Sabha Election 2019: भाजपा के लिए खतरे की हल्की घंटी और कांग्रेस के लिए सकारात्मक संदेश

भारतीय चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इसके साथ ही शुरू हो गया है आंकड़ों के आइनों में राजनीतिक दलों के अतीत के आधार पर उनके आने वाले भविष्य को देखने का मजेदार खेल। जो कल से शुरू होकर 2 नतीजे आने तक जारी रहेगा। हम भी आपकों हर नए दिन आंकड़ों के जरिए चुनावी हार-जीत के रोमांचक गणित से रूबरू कराते रहेंगे।

इस कड़ी में आज आप लोगों को यह बता दें कि अगर हम 2014 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद 27 राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव और इन चुनावों के नतीजों पर नजर घुमाएं तो फिर अपनी जीत को लेकर एकदम आश्वस्त नजर आ रही भाजपा के कानों में खतरे की घंटी बजती हुई सुनाई पड़ सकती है। फिलहाल जो माहौल है, उसमे भाजपा और हार इन दोनों का दूर-दूर तक कोई रिश्ता नजर नहीं आता।

लेकिन, जैसा कि ऊपर बताया गया कि हम आपकों अंकों के जरिए राजनीति के रोमांचक गणित से रूबरू कराएंगे, तो इस कड़ी में पहला आंकड़ा 2014 लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के वोट प्रतिशत में आई गिरावट और कांग्रेस के वोट प्रतिशत के हुए इज़ाफ़े को लेकर है। जी हां, बीजेपी ने 2014 के बाद हुए ज्यादातर चुनाव में बाजी जरूर मार ली हो, पर बात जब वोट प्रतिशत की आती है तब बीजेपी पिछड़ती नजर आती हैं।

यह हम सब जानते हैं कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा को सबसे ज्यादा 16.95 करोड़ लोगों ने वोट दिया था। जो कि तब हुए कुल मतदान का करीब 31% था। वहीं, उस साल सत्ता से बेदखल हुई कांग्रेस के पक्ष में 10.6 करोड़ लोगों ने ही मतदान किया था। और यह कुल मतदान का 20% था। 31 प्रतिशत मतदान के साथ भाजपा को 282 सीट मिली थी और वहीं 20 प्रतिशत वोट के साथ कांग्रेस महज 44 सीट पर सिमट गई थी।

लेकिन अगर, बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 27 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों की तो यहां भाजपा के लिए खतरे की हल्की घंटी बजती है और कांग्रेस के लिए की थोड़ी राहत की बात नजर आती है। दरअसल लोकसभा चुनावों के बाद 27 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में करीब 15.5 करोड़ यानी 28.5 प्रतिशत मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में वोट किया, जबकि कांग्रेस को लगभग 12.2 करोड़ यानी 22.2 प्रतिशत वोट मिले।

इससे यह बात निकलकर सामने आती है कि मोदी सरकार की लोकप्रियता साल 2014 की तुलना में पिछले 5 सालों में थोड़ी कमी आई है। इस नतीजे पर पहुंचना का कारण यह है कि लोकसभा-2014 में जहां बीजेपी को 16.95 करोड़ मिले। वहींउसके बाद हुए 27 विधानसभा में उसे 16.95 की बजाय 15.5 करोड़ वोट ही मिले। यानी करीब 90 लाख वोटों का नुकसान। और वहीं इसके ठीक उलट कांग्रेस को मिलने वाले वोटों की संख्या 10.6 करोड़ से बढ़कर 12.2 करोड़ हो गई। यानी पिछले पांच सालों में 27 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के जनाधार में 1.6 करोड़ लोगों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

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