Lok Sabha Election 2019: मुसलमानों का असली मसीहा कौन? रमज़ान में वोटिंग को लेकर छिड़ी बहस

भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। अब इन्हीं तारीखों को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। इस बहस की शुरुआत की तृणमूल कांग्रेस के लीडर और कोलकाता मेयर Firhad Hakim ने। उन्होंने बंगाल में होने वाले 7 चरणों के चुनाव पर सवाल उठाया था। उन्होंने इसके पीछे बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में रमजान महीने में मुसलमानों को होने वाले परेशानियों का हवाला दिया है।

Firhad Hakim ने कहा था कि इलेक्शन कमीशन एक संवैधानिक निकाय है और हम उनका सम्मान करते हैं। हम उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहना चाहते। लेक़िन 7 चरणों में होने वाला चुनाव बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए मुश्किल होगा। यह उन लोगों के लिए कठिन होगा जो उस समय रमज़ान मना रहे होंगे।

इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस बहस में अपने आप को शामिल कर लिया। ओवैसी ने कहा कि रमजान में मुसलमान निश्चित रूप से उपवास करेंगे, वे बाहर जाते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं, वे कार्यालय जाते हैं, यहां तक ​​कि गरीब से गरीब व्यक्ति भी उपवास करेगा। मेरा विश्लेषण यह है कि इस महीने (रमज़ान) में मतदान प्रतिशत बढ़ेगा क्योंकि व्यक्ति सभी सांसारिक कर्तव्यों से मुक्त होगा।

यह पूरा विवाद अनावश्यक है। मैं उन राजनीतिक दलों से ईमानदारी से अनुरोध करूंगा कि कृपया मुस्लिम समुदाय और रमज़ान का उपयोग उन कारणों के लिए न करें जो आपके पास हैं।

~Shravan Pandey

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