Namami Gange: स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन ने कानपुर क्षेत्र के लिए 2,192 करोड़ रुपये की परियोजना को दी मंजूरी

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स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन(NMCG) ने Namami Gange प्रोग्राम के तहत नदी में सीवेज के पानी के प्रवाह को रोकने के लिए कानपुर जोन के लिए 2,192 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है।

कानपुर, गंगा के तट पर बसा उत्तर प्रदेश का घनी आबादी वाला शहर है। शहर की आबादी लगभग 32 लाख है। यह प्रतिदिन 450 मिलियन-लीटर सीवेज और अन्य सॉलिड वेस्ट जनरेट करता है। यहाँ कुछ 400 चमड़े का कारखाना है। ये कारखाने विषाक्त अपशिष्ट पैदा करते हैं।

लंबे समय से शहर के 16 प्रमुख नालों से अनुपचारित सीवेज सीधे गंगा नदी में बहकर जाता था। इसी को रोकने के लिए NMCG को कार्य सौंपा गया है। मुख्य नालों को टैप करके 250 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

प्रतिदिन 140 MLD घरेलू सीवेज पैदा करने वाले सीसामऊ नाले को पूरी तरह से टैप कर दिया गया है। इस नाले से निकलने वाले अनुपचारित जल को बांगवां औऱ जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में डायवर्ट कर दिया जाता है। कई दशकों से गंगा नदी के जल को प्रदूषित करने की वज़ह से यह ड्रेन बदनाम था।

कानपुर में अर्बन सीवेज के अलावा लेदर इंडस्ट्री को गंगा में इंडस्ट्रियल पॉल्युशन का मुख्य स्रोत माना जाता है। Namami Gange कार्यक्रम के शुभारंभ के साथ 260 विषम चर्म शोधनालयों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं ताकि नदी में कोई प्रवाह न हो।

कई बड़े चर्म शोधनालयों ने अपना ख़ुद का धाराप्रवाह उपचार प्लांट स्थापित किया है। ये प्लांट कुछ ठोस अपशिष्ट जैसे कि जानवरों की त्वचा, कीचड़, और मलमूत्र के अवशेषों को अलग कर देते हैं। यहाँ से, आंशिक रूप से संसाधित चर्म शोधनालय कीचड़ को एक बड़े आम प्रवाहित उपचार संयंत्र में आगे के उपचार के लिए भेजा जाता है।

प्रतिदिन ये चर्म शोधनालय 20 करोड़ लीटर प्रदूषित जल निकालते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन ने चर्म शोधनालयों के गंदे पानी के उपचार हेतु 554 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 20 मिलीयन लीटर प्रतिदिन प्रभावी उपचार संयंत्र को मंजूरी दी है।

स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन औद्योगिक कचरे के गंगा नदी में प्रवाह का डिजिटल निगरानी कर रहा है। स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा ने कहा है कि इंडस्ट्री जानती है कि संस्थाएं आती रहेंगी और बारीकी से निरीक्षण करेंगी ऐसी स्थिति में उनके बंद होने की संभावनाएं ज्यादा हैं। इसी डर से इन इंडस्ट्रीज में अनुशासन देखने को मिलता है। हम इस दिशा में और भी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि ऑनलाइन एफ्लूएंट क्वालिटी मॉनिटरिंग हो ताकि मैनुअल छेड़छाड़ संभव न हो सके।

स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन ने कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, मथुरा, पटना, कोलकाता, हावड़ा-बाली और भागलपुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के स्थापना की पहल शुरू की है। इन स्थानों से कुल सीवेज डिस्चार्ज का 64 फीसदी हिस्सा बनता है।

इन शहरों में 9883 करोड़ रुपए की लागत से कुल 1109 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल का इस्तेमाल सिंचाई केेेे लिए किया जा रहा है।

अमृत योजना स्कीम के तहत कानपुर शहर में हर घर को सीवर कनेक्शन दिया जाएगा ताकि घरेलू कचरे बह कर इन ट्रीटमेंट प्लांट में जाएं। कानपुर जैसे शहरों से शहरी सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह को रोककर सरकार के प्रयासों से पवित्र नदी को साफ रखने में मदद मिलेगी।

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