Nepal: समाज की गंदी सोच से गई एक और महिला की जान, Menstruation Hut में दम घुटने से हुई मौत

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” Menstrual Hut में हवादार खिड़कियां भी नहीं। कड़ाके की ठंड और झोपड़ी में कोई सुविधा नहीं क्योंकि उस झोपड़ी में एक अपवित्र महिला को रखा गया। ठंड से कांपती वह महिला लकड़ी जलाती है। उससे निकलने वाला धुंआ उसी झोपड़ी में उस महिला की जान ले लेता है।”

सृष्टि की जननी नारी का कितना बड़ा अपमान होता है जब उसकी ही कोख से जन्मा पुरूष उसे उसकी मासिक धर्म ( menstruation ) की वजह से अपवित्र कहकर तिरस्कृत नज़रों से देखता है। समाज की यह गंदी सोच उस वक़्त भी मौजूद है जब यह समाज ख़ुद को आधुनिक सोच और वैज्ञानिक युग का मनुष्य कहता है।

नेपाल में कुछ हफ़्ते पहले ही ठंड से एक निर्दोष मां औऱ उसके 2 बच्चे समाज के उस गंदी सोच का शिकार हो गए जो सदियों से चला आ रहा है। फिर उसी नेपाल से एक और महिला के मौत की ख़बर आयी है। लेक़िन हमें क्या फ़र्क पड़ता है क्योंकि मरने वाली कोई हमारी नहीं है। जी हां, लेकिन मरने वाली हमारी गंदी सोच की वजह से मरी है।

एक महिला को मासिक धर्म ( menstruation ) आता है। उसकी सास उसे घर से बाहर कर देती है। वह लाचार महिला एक झोपड़ी Menstruation Hut में शरण लेने को मजबूर हो जाती है। उस Menstrual Hut में हवादार खिड़कियां भी नहीं। कड़ाके की ठंड और झोपड़ी में कोई सुविधा नहीं क्योंकि उस झोपड़ी में एक अपवित्र महिला को रखा गया। ठंड से कांपती वह महिला लकड़ी जलाती है। उससे निकलने वाला धुंआ उसी झोपड़ी में उस महिला की जान ले लेता है।

नेपाल के कई समुदायों में मासिक धर्म ( menstruation ) के दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है। इतना ही नहीं दूर-दराज के कुछ इलाकों में तो उन्हें घर से दूर एक अकेली झोपड़ी में सोने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे नेपाल में chhaupadi के नाम से जाना जाता है।

21 साल की एक महिला पारबती बोगती ( Parbati Bogati ) की गुरुवार को पश्चिमी Doti जिले में एक सास जब अपने बहू की हाल जानने जाती है तो धुँए से भरे उस झोपड़ी में पारबती बोगती मरी हुई पाई जाती है। पुलिस आती है और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज देती है।

आपको बता दें कि Chhaupadi को साल 2005 में गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था। लेक़िन आज भी नेपाल के कई हिस्सों में इसका चलन है। विशेष रूप से दूरस्थ और रूढ़िवादी पश्चिमी क्षेत्रों में। यह प्रथा हिंदू धर्म से जुड़ी हुई है और मासिक धर्म ( menstruation ) के दौरान और प्रसव के बाद महिलाओं को अछूत मानती है। Chhaupadi के तहत, महिलाओं को भोजन, धार्मिक चिह्न, मवेशी और पुरुषों को छूने से रोक दिया जाता है।

पिछले साल काठमांडू ने तीन महीने की जेल की सजा और 3,000 रुपये (30 डॉलर) का जुर्माना लगाया था। यह सजा उनके लिए है जो किसी भी तरह से chhaupadi को लागू करने के लिए पकड़े जाते हैं। कानून के प्रारूपण में शामिल एक कानून निर्माता गंगा चौधरी ने कहा कि कानून को लागू करने और सामाजिक मानदंडों को बदलने के लिए बहुत अधिक किए जाने की आवश्यकता है।

चौधरी ने कहा, “हमने महसूस किया है कि इस तरह की प्रथाओं को समाप्त करने के लिए केवल कानूनी प्रावधान ही पर्याप्त नहीं हैं। हमें महिलाओं को जागरूक करने और शिक्षित करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है।”

uvayu.com ऐसी घटनाओं की घोर निंदा करता है। हम आज के शिक्षित समाज से आग्रह करते हैं कि भ्रांतियों और रूढ़िवादी विचारधारा को त्याग कर एक मजबूत और खुशहाल समाज का निर्माण करें। महिलाओं के साथ हो रहे इस घोर अन्याय का विरोध करें, क्योंकि ये महिलाएं हमारी ही मां, बहन, बेटी हैं।

~Shravan Pandey

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