Pulwama terrorist attack – आतंक की टहनियां नहीं जड़ काटनी होगी

सबसे खतरनाक क्या होता है? इस सवाल का जवाब दशकों पहले पाश देकर चले गए। उनके मुताबिक सबसे खतरनाक ‘मुर्दा शांति से भर जाना’ होता है। लेकिन मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर पाश आज के दौर में मौजूद होते और हर रात न्यूज़ चैनल देखने का ‘नशा’ करते तब सबसे खतरनाक होने को लेकर उनके विचार एकदम विपरीत होते। 40 जवानों के शहादत की दुःखद खबर पर भी पॉलिटिकल पॉइंट स्कोर करने की कोशिश में टीवी एंकर और प्रवक्ताओं की चाव-चाव को देखकर पाश यकीनन सबसे खतरनाक मुर्दा शांति से भर जाने कि बजाय अति संवेदनशील मुद्दों पर भी फूहड़ वाचलता पर उतर आने को बताते।

कल शाम जैसे ही खबर आई कि कश्मीर के पुलवामा में CRPF बटालियन पर आतंकी हमले में 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए, वैसे ही न्यूज़ चैनल से लेकर सोशल मीडिया तक लोग सियासी उल्टियां करने लग गए। जिस खबर पर किसी भी आम भारतीय का कलेजा फट जाना चाहिए, वैसी खबर पर भी कोई कांग्रेस को गरियाने लगा तो कोई मोदी के 56 इंच पर तंज कसने लगा। कुछ लोग हद से ज्यादा गिरते हुए आतंकी हमले पर भी फेक आईडी से किए गए पोस्ट और ट्वीट को आधार बनाकर हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर सांप्रदायिक उल्टी करने में लग गए।

आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के चीथड़ों की ख़ामोश चीख़ और शहीद हुए जवानों के बिलखते परिवार का दृश्य देखकर गमगीन होने की बजाय सोशल मीडिया से लेकर टीवी तक लोग अपना अपना पॉलिटिकल पॉइंट स्कोर करने की बेहयाई में जुट गए। सरकार के समर्थन में झंडा उठाए रखने वाले लोग इस हमले के लिए धर्म विशेष को गालियां बकने लगे। और सरकार के विरोध में स्वर बुलंद रखने वाले लाशों की गिनती गिनाकर प्रधानमंत्री के 56 इंची छाती पर कटाक्ष कसने लग गए।

ऐसा समय सिर्फ तीन चीज़ो के लिए होता है। सबसे पहला तो शहीद हुए जवानों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करने का, दूसरा हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी देश और संगठन के खिलाफ सख़्त से सख्त कार्रवाई के लिए सरकार पर दबाव बनाने का और अंत में जवानों की सुरक्षा में हुई चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने का। लेकिन, ऐसा कभी होता नहीं है। किसी भी आतंकी हमले के बाद हम तुरंत एक देश की तरह कंधे से कंधा मिलाकर एक दूसरे के साथ खड़े होने के बजाय आपस में ही लड़ने-झगड़ने लग जाते हैं। इससे दुश्मन भी खुश हो जाता है और सत्ता में बैठे जिन लोगों की चूक की वजह से जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी, उनकी गर्दन भी बच जाती है।

ख़ैर, भारत सरकार ने आखिरकार पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए उससे मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया है। हालांकि, इसका पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि इन दोनों देशों के बीच पहले ही बहुत कम व्यापार होता है। लेकिन, भारत सरकार के इस कदम के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मायने बहुत बड़े है। ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह कि सरकार का यह पहला कदम है और हमले की विभिस्ता के साथ-साथ देश में पैदा हुए गुस्से को देखते हुए जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ़ इस तरह के और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

वैसे, पाकिस्तान के खिलाफ जो किया जाएगा वो बाद की बात है। कश्मीर में अगर हमें आतंकियों का सर्वनाश करना है तो सबसे पहले आतंकियों को मानवाधिकार की आड़ में कवर करने वाले अलगावादी नेताओं को ठिकाने लगाना होगा। क्योंकि यही वो लोग हैं जो कश्मीरी लड़कों के दिमाग में धर्म के नाम पर जहर भरते हैं और उन्हें मानव बम बनने के लिए तैयार करते हैं। आतंक के पेड़ को गिराने के लिए हमला हमें जड़ों पर करना होगा क्योंकि टहनी काटने से कुछ समय के लिए समस्या हल जरूर होती नजर आएगी। लेकिन, जड़ हमारी ही जमीन का इस्तेमाल कर कट चुकी टहनियों को दोबारा जिंदा कर देंगे।

No Comments Yet

Leave a Reply

Your email address will not be published.

युवा देश से जुड़ी समाजिक सरोकार रखने वाली खबर, आम आदमी से जुड़े खास मुद्दों के करीब, बेवज़ह और बेतुके के ड्रामे से दूर, हवा हवाई बातों के इतर जमीनी हकीकत से जुड़ी खबरों को देखने के लिए सब्सक्राइब करे हमारा चैनल युवायु। Contact us: info@uvayu.com