Padma Shri पाने वाली राजकुमारी देवी, पा चुकी हैं किसान श्री अवॉर्ड

अगर आपको लगता है कि किसानी सिर्फ पुरुषों के बस की बात है तो इस गलतफहमी से बाहर आ जाइए जनाब। हम गलतफहमी इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज हम आपको किसान श्री अवॉर्ड पाने वाली उस राजकुमारी देवी की कहानी आपको बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आप कहेंगे ‘अरे वाह! इ तो राजकुमारी देवी ने कमाल कर दिया है। और हाँ, राजकुमारी देवी ने तो इस बार पद्म श्री अवॉर्ड भी हासिल कर लिया है। क्या हुआ हैरानी हो गई न! हैरान मत होइए, आइये अब आपको पूरी कहानी बता ही देते हैं।

आपको ये तो मालूम ही होगा कि भारत सरकार हर साल कुछ चुनिंदा लोगों का नाम उस लिस्ट में शामिल करती है जिन्हें सम्मानित करना होता है। इन सम्मानों में जो सबसे बड़ा सम्मान है उसे हम भारत रत्न की संज्ञा देते हैं। उसके बाद पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पद्म श्री की बारी आती है। ये सम्मान अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रहे उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने कुछ ऐसा किया हो जो अपने आप में अनूठा हो। आज हम जिस राजकुमारी देवी की कहानी बताने जा रहे हैं उनके बारे में सुनने के बाद आप भी अपने अंदर उस क़्वालिटी को ढूंढने की कोशिश करेंगे।

तो इस कहानी की शुरुआत होती है बिहार के मुजफ़्फ़रपुर जिले से। मुजफ़्फ़रपुर के सरैया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले आनंदपुर गांव में रहती हैं राजकुमारी देवी। जब राजकुमारी 15 साल की थीं तभी उनकी शादी कर दी गई। टीचर पापा की दुलारी राजकुमारी को अपने पापा के घर पर बड़ा लाड प्यार मिला था। लेकिन ससुराल में उनके दुःख के दिन शुरू हो गए। शादी हुए नौ साल बीत चुके थे राजकुमारी को कोई संतान नहीं हुई। राजकुमारी के पति अवधेश कुमार बेरोजगार थे। वह बस अपने खेतों में तम्बाकू उगाना जानते थे।

पति की इस स्थिति ने राजकुमारी को लाचार कर दिया। मज़बूरी ऐसी कि खेती भी करना पड़ा। लेकिन खेती से उतनी उपज नहीं हुई कि उसे बेचकर रोज़मर्रा की और भी चीजें खरीदी जा सकें। उसके बाद राजकुमारी ने कुछ हटकर सोचा और खेती से निकलने वाली चीज़ों का इस्तेमाल कर अचार, मुरब्बे जैसे ही नए-नए प्रोडक्ट बनाने शुरू कर दिए। प्रोडक्ट तो रेडी हो गया लेकिन मेन प्रॉब्लम तो अब आया वो भी उसे बेचने की।

राजकुमारी ने इसकी जिम्मेदारी उठायी और साईकिल पर लादकर अपने प्रोडक्ट को मार्केट में बेचने निकल पड़ीं। इस पर पति को झल्लाहट आना लाजिमी था, और आया भी। लेकिन राजकुमारी देवी हार मानने वालों में से नहीं थीं। अब क्या, अब तो राजकुमारी देवी को नया नाम मिल गया लोग प्यार से साइकल देवी कहकर बुलाने लगे। तब उनके मन में बात आयी कि क्यों न कुछ अलग और बेहतर तरीके से काम किया जाए। उन्होंने पूसा कृषि विश्वविद्यालय जाकर फ़ूड प्रोसेसिंग सीखा। वापस आकर उन्होंने पास-पड़ोस की औरतों को भी तौर-तरीका सिखाया।

अब राजकुमारी देवी दूर-दूर तक एक पहचान बन चुकी थीं। साल 2003 में लालू यादव ने सरैया मेल में उनको सम्मानित किया। जब नीतीश कुमार सत्ता में आए तब उनके घर आकर उन्होंने सब जायजा लिया। साल 2007 में राजकुमारी को किसान श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अभी तक किसान श्री अवॉर्ड पाने वाली वो पहली महिला थीं। इनको अमिताभ बच्चन ने अपने शो आज की रात है जिंदगी में भी बुलाया था।

शो के बाद उनको पांच लाख रुपए, आटा चक्की और साड़ियां गिफ्ट किए गए थे। राजकुमारी देवी ने गांव की औरतों को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स बनाने के लिए प्रेरित किया। आपको बता दें कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स छोटे-छोटे समूह होते हैं जो साथ मिलकर कोई भी आजीविका का काम करते हैं। राजकुमारी देवी को अकेले खेतों में काम करता हुआ देखकर सीखने वाली औरतें आज खुद अपने पांव पर खड़ी हो रही हैं।

uvayu.com राजकुमारी देवी की इस महान उपलब्धि पर उन्हें ढेर सारी बधाई देता है। उम्मीद करते हैं कि राजकुमारी देवी के इस संघर्ष से प्रेरणा लेकर और भी महिलाएं स्वावलम्बी बनेंगी और समाज में शान से सिर उठाकर जी सकेंगी।

~Shravan Pandey

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