Stalking क्या है? और Stalking जुर्म पर किस सजा का प्रावधान है?

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Stalking क्या है? और Stalking जुर्म पर किस सजा का प्रावधान है?
हमारा समाज महिलाओं की इज़्ज़त तब तक ही करता है जब तक कि वह मूर्ति रूप में हो या फिर निर्जीव हो। अब मूर्ति रूप में दुर्गा माँ, पार्वती माँ, काली माँ, सरस्वती माँ का कितना आदर, सत्कार और सम्मान करते है। वहीं निर्जीव रूप में हम भूमि को पूजते है। गंगा, यमुना, सरस्वती,नर्मदा, गोदावरी जैसी नदियों को माँ बोल इनमे डुबकी लगाते है। यहां तक कि अपने देश को भारत माता कहकर पूजते है।

लेकिन तब क्या जो जाता है हमारी मानसिकता को जब मामला किसी सजीव लड़की को होता है। तब काहे हम बजाय उसकी इज़्ज़त करने के उसे लूटने के लोभ में पड़ जाते है। फिर फर्क नही पड़ता की वह लकड़ी 7 महीने की नवजात हो, 7 साल की बच्ची हो या फिर 70 साल की बुजुर्ग। वह घर पर हो, स्कूल में हो, खेल के मैदान में हो या फिर किसी बाजार में। हर हर समय और हर जगह कोई न कोई उन्हें घूरने, निहारने, ताकने, छूने, सटने, दबोचने की फिराक में रहता है। और यह ‘कोई’, कोई दूसरा नही बल्कि वही होता है जो मूर्ति रुप के नारी की पूजा करता है।

 Stalking

इसी विकृत मानसिकता के चलते भारत मे सदियों से महिलाएं यौन हिंसाओ का शिकार होती आ रही है। हमें रोजाना ऐसी खबरें पढ़ने और सुनने को मिल जाती है कि लफंगो के चलते लड़की के माँ-बाप लड़की का स्कुल-कॉलेज जाना बंद करवा देते है। दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ हुई दरिंदगी हमारे समाज मे व्याप्त ऐसी यौन वुकृति की ही बानगी थी। इस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया था। लड़कियों से जुड़े ऐसे अपराधों को लेकर लोगों में जो गुस्सा था, वह इस मामले के सामने आने के बाद एकदम से फुट पड़ा था। जसिके चलते लोगो में पैदा हुए ऐसे आक्रोश का ही नतीजा था कि सरकार को ‘एंटी रेप बिल’ में संशोधन कर कई कड़े कानूनी प्रावधानों को सम्मलित करना पड़ा।

इन्ही प्रावधानों में से एक है स्टॉकिंग के ख़िलाफ़ लाया गया कानून । स्टॉकिंग का शाब्दिक अर्थ किसी का ‘पीछा करना’ होता है। भारतीय दंड सहिंता की धारा 354(D) के तहत इस जुर्म में सजा का प्रावधान तय किया गया है। इसके तहत स्टॉकिंग को निम्नलिखित ढंग से परिभाषित किया गया है;

Stalking

इस प्रावधान के तहत किसी महिला का लगातार पीछा करना, उसे छुप-छुपकर देखना, उसे घूरना या फिर निहारना, उस पर छींटाकशी करना, उसको लेकर फब्तियां कसना यह सब मामला Stalking के तहत अपराध माना जाता है। स्टाकिंग(Stalking) सिर्फ इतना ही नहीं है। अगर आप किसी लड़की को अश्लील मैसेज भेजते हैं और उसे बार-बार फोन करके परेशान करते हैं, तो यह भी स्टॉकिंग के तहत आता है। आपको शायद इस बात की खबर ना हो। लेकिन अगर आप किसी लड़की के फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर उसके द्वारा किए पोस्ट पर अनर्गल भाषा का इस्तेमाल करते हैं तो उसकी आपत्ति पर भी आप पर स्टॉकिंग के तहत मामला दर्ज हो सकता है।

व्हाट्सएप्प पर आपत्तिजनक संदेश, तस्वीर, वीडियो भेजना भी आपको स्टॉकिंग के तहत जेल की हवा खिला सकता है। इतना ही नहीं, बार-बार मना करने के बावजूद लड़की को इंटरनेट के किसी भी सोशल मीडिया साईट पर मैसेज भेजने पर भी स्टॉकिंग के तहत दंड का प्रावधान है। ध्यान रहे कि हद से ज्यादा किसी लड़की की निजी जिंदगी फिर चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन स्टॉकिग के तहत ऐसे मामलों में भी सज़ा का प्रावधान है। ऑफलाइन स्टाकिंग(Stalking) से तो लड़कियां अपने परिवार और पुलिस की मदद से किसी तरह निपट लेती है। लेकिन ऑनलाइन स्टाकिंग(Stalking) को लेकर ना तो लड़कियों को ज्यादा जानकारी होती है और ना ही  इससे पीड़ित होने पर उन्हें इससे बचने के ज्यादा उपाय पता होते है।  इसके खिलाग कानून कार्यवाई तो दूर की कौड़ी होती है।
तो चलिए जानते है की a)ऑनलाइन स्टाकिंग(Stalking)  क्या होती ह?
b)इससे कैसे बचा जा सकता है?

इसके खिलाफ सजा के क्या प्रावधान है? 

सबसे पहले तो आप यह जान ले कि इंटरनेट का इस्तेमाल कर की जाने वाली स्टाकिंग(Stalking) को क़ानूनी भाषा में ‘सायबर स्टाकिंग’ कहते है।  ऊपर दी गई जानकारी के अनुरूप अगर कोई आपको फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प, इंस्टाग्राम जैसे सोशल साइट्स पर ट्रोल(बदनाम) कर रहा है, कॉल या मेसेजस कर आपको परेशान कर रहा है, अश्लील संदेश, चित्र या फिर वीडिओ भेज रहा है, आपकी कोई फोटो,आपसे जुडी कोई जानकारी या फिर आपके निजी जिंदगी से जुडी कोई भी बात अगर कोई आपकी अनुमति के बगैर सार्वजनिक कर रहा है, तो इन सभी स्थिति में उसके खिलाफ सायबर स्टाकिंग (Stalking) का आपराधिक मामला बनता है। 

Stalking

सायबर स्टाकिंग (Stalking) से बचने का सबसे प्रमुख उपाय है, सोशल साइट्स पर बनाये गए अपने अकाउंट्स के पासवर्ड को सुरक्षित रखना। जब तक बहुत जरुरी ना हो, तब तक सार्वजनिक कम्प्यूटर का इस्तमाल करने से बचना। बैलेंस रिचार्च करवाने के लिए दुकानदार को अपना मोबाइल नंबर देने की बजाय रिचार्च कूपन का इस्तेमाल करना। क्यूंकि बहुत से ऐसे मामले सामने आए है, जिनमे यह बात निकलकर सामने आई कि दुकानदार लड़कियों का नंबर रुपयों की लालच में लफंगो को बाँट देते है। सबसे जरूरी बात यह कि अगर आपको जरा भी संदेह होता है कि आपके साथ कुछ गलत हो रहा है या भविष्य में ऐसा कुछ होने की संभावना है। तो इस बात की रिपोर्ट तुरंत सायबर सेल से कर देना चाहिए।

भारतीय दंड संहिता की धारा 354(D) के तहत ऐसे मामलों में पहली बार गिरफ्तार किए जाने पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। स्टॉकिंग के पहले मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। लेकिन स्टॉकिंग के मामले में दूसरी बार पकड़े जाने यह अपराध गैर जमानती हो जाता है। जिसमे अधिकतम सजा का प्रावधान तीन साल से बढ़कर पांच साल हो जाता है।

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