Stethoscope :(1781-1826) फ़्रेंच डॉक्टर Rene Laennec के शर्माने की प्रवृत्ति के चलते हो गया एक महान आविष्कार

जिसने की शरम उसके फूटे करम!’ अब यह लाइन इतनी कॉमन है कि या तो आपने इसे किसी को सुनाया होगा या फिर आपको किसी ने यह लाइन सुनाई ही होगी। इसका कुल मिलाकर सार यही है कि जिंदगी में शर्म और झिझक जैसी प्रवृत्ति के चलते आदमी अपनी क्षमतानुसार प्रगति नहीं कर पाता है। लेकिन, आज हम आपकों इस मुहावरे के अपवाद से जुड़ी एक अनोखी घटना बताने जा रहे है।

दरअसल, जिस शरम को हम प्रोडक्टिविटी के लिए नुकसानदेह मानते है, उसी शरम के चलते मेडिकल फील्ड में एक बहुत ही शानदार आविष्कार हुआ। आविष्कार उस स्टेथोस्कोप (Stethoscope) का जो डॉक्टर्स के परिधान का हिस्सा बन गई। मेडिकल साइंस के सबसे बड़े आविष्कारों में से एक इस आविष्कार का श्रेय जाता है आदमी की शरम करने की प्रवृत्ति को।

जी हां, फ्रेंच वैज्ञानिक रेने थियोफाइल हाएसेनिक लीनेक (René Laënnec)के शर्माने का ही नतीजा था कि स्टेथोस्कोप( Stethoscope)जैसा अद्भुत आविष्कार सामने आया। दरअसल, स्टेथोस्कोप के आविष्कार से पहले डॉक्टर किसी मरीज की जांच के लिए उसके सीने के पास कान लगाकर उसकी धड़कनें सुनते थे। लेकिन बात जब महिलाओं की आती थी, तब लीनेक ऐसा करने में शर्म के मारे बहुत ज्यादा झिझकते महसूस करते थे।

हालांकि, शरम अपनी जगह ठीक था, लेकिन लीनेक को अपने पास आई महिला मरीजों का इलाज भी करना था। तो इस स्थिति का समाधान उन्होंने स्टेथोस्कोप की रचना कर निकाला। उन्होंने बांसुरी से प्रेरणा लेते हुए कागज को मोड़कर उससे ट्यूब जैसी सरंचना बनाई। ट्यूब के एक सिरे को महिला के चेस्ट पर दबाया और दूसरे सिरे को अपने कान के पास लगाकर उसकी हार्ट बीट सुन ली।

अपने इस मॉडल की कार्यक्षमता से प्रोत्साहित होकर लीनेक (Rene Laennec (1781-1826)ने बाद में लकड़ी के कई खोखले मॉडल बनाए जिसके एक सिरे पर माइक्रोफोन लगा था और दूसरे सिरे पर ईयरपीस। अपने इस नए यंत्र को उन्होंने नाम दिया था स्टेथोस्कोप। स्टेथोस्कोप इसलिए क्योंकि स्टेथोस्कोप ग्रीक भाषा के शब्द stethos (यानि की चेस्ट) और scopos (परीक्षण) से मिलकर बना है। यानि चेस्ट के परीक्षण को स्टेथोस्कोप कहा जाता है।

जन्म 17 फरवरी 1781 में फ्रांस में जन्में रेने लीनेक ने 34 साल की उम्र में 1815 में फ्रेंच राजशाही के स्थापित होने के बाद नेककर नामक हॉस्पिटल में काम करना शुरू कर दिया। और यहां काम करने के दौरन ही 1816 में उन्होंने स्टेथोस्कोप जैसी चीज का आविष्कार कर दिया। अपने इस आविष्कार के महज 10 साल बाद ही रेने लीनेक(Rene Laennec (1781-1826)की 45 वर्ष की आयु में ट्यूबरक्यूलोसिस(TB)नामक रोग से मृत्यु हो गई।

– रोशन ‘सास्तिक’

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