Terror Attack: साल 1999 से लेकर अब तक कितने बार दहला जम्मू-कश्मीर

14 फरवरी 2019 को एक बार फिर देश दहल गया। देश ने एक बार फिर अपने वीर सपूतों को हमेश-हमेशा के लिए खो दिया। पुलवामा में हुए इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ ( CRPF ) के 44 जवान शहीद हो गए। यह इस साल का अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब हमारे देश की शांति को छीनकर दहशत का माहौल पैदा करने की नापाक साजिश रची गई। दिल दहला देने वाले इस आतंकी हमले ने देश की चेतना को आक्रोश से भर दिया। हर भारतवासी जवानों की शहादत का बदला चाहता है। आज हम जानेंगे कि घाटी में पिछले दो दशकों में इन कितने बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया और देश का सीना छलनी हुआ।

26 अगस्त 2017- जैश-ए- मोहम्मद के 3 आतंकवादियों ( Terrorists ) ने जिला पुलिस लाइंस पुलवामा में हमले को अंजाम दिया। इस हमले में सुरक्षा बल के 8 जवानों की जान गई। हालाँकि, बाद में हमलावरों को मार गिराया गया।

29 नवंबर 2016- जम्मू के नगरोटा में 3 आतंकवादियों ( Terrorists ) ने सेना के आर्टिलरी कैंप पर हमला किया। इस हमले में 7 सैनिक शहीद हुए। जवाबी कार्रवाई में हमलावरों का सफाया कर दिया गया।

18 सितंबर 2016- 4 पाकिस्तानी आतंकवादियों ( Terrorists ) ने बारामुला जिले के उरी में एक सेना के शिविर पर हमला किया, जिसमें 18 सैनिकों की जान चली गई। उनमें से ज्यादातर सैनिक नींद में थे। जवाबी कार्रवाई में हमलावर भी मारे गए थे। इस घटना के कारण भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक किए गए

25 जून 2016- श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर पंपोर में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ ( CRPF ) की बस पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हमले में 8 जवान शहीद हुए।

3 जून 2016- पंपोर में आतंकवादियों ( Terrorists ) सीआरपीएफ ( CRPF ) की एक बस को निशाना बनाया। इस दौरान 2 अधिकारियों की मौत हो गई। आतंकी एक सरकारी भवन में छिप गए। सेना और आतंकियों के बीच दो दिनों तक मुठभेड़ जारी रहा। दो अधिकारियों सहित तीन सैनिकों और दो हमलावरों की जान गई। इस हमले में एक नागरिक की भी मौत हुयी थी।

5 दिसंबर 2014- भारी हथियारों से लैस 6 आतंकवादियों ( Terrorists ) ने उरी के मोहरा में सेना के शिविर पर हमला किया। इन घुसपैठियों के साथ बंदूक की लड़ाई में दस सैनिक मारे गए थे। सभी आतंकियों को भी मार गिराया गया था।

24 जून 2013- आतंकवादियों ( Terrorists ) ने श्रीनगर ( Srinagar ) के हैदरपोरा में निहत्थे सेना के जवानों को ले जा रही एक बस पर हमला कर दिया। इस हमले में आठ सैनिक मारे गए।

19 जून 2008- जब शहर के बाहरी इलाके में श्रीनगर-बारामुला राजमार्ग पर नारबल में सड़क किनारे लगाए गए एक IED को आतंकवादियों ने ब्लास्ट करवाया तब दस सैनिक मारे गए थे।

2 नवंबर 2005– एक आत्मघाती हमलावर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निजी आवास के पास, Nowgam में अपनी कार को उड़ा दिया। इस घटना में तीन पुलिस और छह नागरिक मारे गए।

20 जुलाई 2005- एक आत्मघाती कार हमलावर ने अपने वाहन को सुरक्षा बलों के वाहन में टक्कर मारकर उड़ा दिया। इस घटना में सुरक्षा बल के तीन जवान और दो नागरिक मारे गए।

24 जून 2005- श्रीनगर ( Srinagar ) के बाहरी इलाके में आतंकवादियों द्वारा चलाए गए एक कार बम में सेना के नौ जवान मारे गए।

4 अगस्त 2004- श्रीनगर ( Srinagar ) के राजबाग में सीआरपीएफ ( CRPF ) के शिविर आतंकवादी हमला हुआ। इस हमले में नौ जवान शहीद हो गए। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी भी मारा गया।

8 अप्रैल 2004- बारामूला जिले के उरी में पीडीपी की एक रैली में आतंकवादियों के ग्रेनेड हमले में 11 लोग मारे गए। पीडीपी श्रीनगर-मुजफ्फराबाद रोड को खोलने की मांग कर रही थी।

22 जुलाई 2003 – अखनूर ( Akhnoor ) में सेना के शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में एक ब्रिगेडियर सहित आठ सैनिक मारे गए थे। इस हमले में कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने चोटों का सामना किया।

28 जून 2003- सुंजवान आर्मी कैंप ( Sunjwan Army Camp ) पर आतंकवादियों के आत्मघाती हमले में एक अधिकारी सहित 12 सैनिक मारे गए। दो आतंकवदियों को मार गिराया गया।

14 मई 2002- सेना की ठिकानों पर हुए सबसे बड़े हमलों में एक है जम्मू में कालूचक सेना के छावनी ( Kaluchak Army Cantonment ) हुआ आतंकी हमला। यहां सेना के छावनी में घुस आए तीन आतंकवादियों ने 36 लोगों की जान ली थी। हमलावर भी मारे गए थे।

17 नवंबर 2001- आतंकवादियों ने रामबन (तब डोडा जिले का हिस्सा) में एक सुरक्षा बलों के ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में 10 सुरक्षा बलों की जान गई थी। चार आतंकवादी भी मारे गए थे।

1 अक्टूबर 2001- श्रीनगर ( Srinagar ) में पुराने विधान सभा परिसर ( Legislative Assembly Complex ) के बाहर आतंकवादियों ने कार बम विस्फोट किया। इस विस्फोट में 38 लोग मारे गए थे, जबकि तीन हमलावरों को भी खत्म कर दिया गया था।

10 अगस्त 2000- आतंकवादियों ( Terrorists ) ने श्रीनगर के रेजीडेंसी रोड पर ग्रेनेड फेंका। जैसे ही सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर इकट्ठे हुए, उन्होंने एक कार बम विस्फोट किया। इस विस्फोट में एक फोटो जर्नलिस्ट के अलावा 11 लोग मारे गए।

18 अप्रैल 2000- कश्मीर विद्रोह में पहली बार “मानव बम” का इस्तेमाल किया गया था। श्रीनगर ( Srinagar ) के बादामीबाग इलाके में सेना मुख्यालय में आत्मघाती कार बम विस्फोट में दो सैनिक मारे गए।

3 नवंबर 1999- आतंकवादियों ने बादामीबाग सेना मुख्यालय ( Badamibagh Army Headquarters ) पर हमला किया, जिसमें रक्षा जनसंपर्क अधिकारी मेजर पुरुषोत्तम सहित 10 सैनिक मारे गए।

~Shravan Pandey

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